2026 में LIC के तीन चाइल्ड प्लान बिक रहे हैं। एक ही बच्चे और एक ही बीमा राशि पर उनकी उम्र सीमा, प्रीमियम अवधि, पेआउट और प्रीमियम वेवर राइडर की तुलना।
LIC पेड-अप वैल्यू वह घटी हुई रकम है जो पारंपरिक पॉलिसी में तब बची रहती है जब आप पेड-अप वैल्यू बनने के बाद प्रीमियम भरना बंद कर देते हैं। फ़ॉर्मूला है: बीमा राशि × (भरे गए प्रीमियम ÷ कुल देय प्रीमियम) + अब तक जमा बोनस। यह रकम मैच्योरिटी पर, या पहले मृत्यु होने पर नॉमिनी को मिलती है। पेड-अप पॉलिसी में नया बोनस नहीं जुड़ता और फ़ाइनल एडिशनल बोनस आम तौर पर नहीं मिलता।
LIC पेड-अप वैल्यू वह रकम है जो पारंपरिक LIC पॉलिसी में तब भी बची रहती है जब आप कुछ साल प्रीमियम भरने के बाद भुगतान बंद कर देते हैं। बीमा राशि भरे गए प्रीमियम के अनुपात में घट जाती है, अब तक जुड़ा बोनस बना रहता है, और कुल रकम मैच्योरिटी पर या पहले मृत्यु होने पर मिलती है। नीचे फ़ॉर्मूला, एक उदाहरण और सरेंडर से तुलना के साथ पूरा हिसाब समझिए।
LIC पॉलिसी पेड-अप कब बनती है?
ग्रेस पीरियड के बाद भी प्रीमियम न भरा जाए तो पॉलिसी अपने-आप पेड-अप बन जाती है, बशर्ते उसमें पेड-अप वैल्यू बन चुकी हो। इसके लिए कोई आवेदन नहीं करना पड़ता। अगर पॉलिसी उस स्तर तक नहीं पहुँची है, तो वह सीधे लैप्स हो जाती है और कुछ नहीं मिलता।
| पॉलिसी | पेड-अप वैल्यू कब बनती है |
|---|---|
| 1 अक्टूबर 2024 से पहले जारी ज़्यादातर रेगुलर प्रीमियम प्लान (8xx और 9xx सीरीज़) | 2 पूरे साल का प्रीमियम भरने के बाद |
| कुछ पुराने प्लान (जैसे 2014 से पहले के कई प्लान) | 3 पूरे साल का प्रीमियम भरने के बाद |
| 1 अक्टूबर 2024 से जारी प्लान (7xx वाले नए संस्करण) | IRDAI के नए नियमों के तहत आम तौर पर एक पूरे साल के प्रीमियम के बाद |
| रेगुलर प्रीमियम वाले शुद्ध टर्म प्लान | आम तौर पर कोई पेड-अप वैल्यू नहीं; कवर बस खत्म हो जाता है |
| सिंगल प्रीमियम प्लान | लागू नहीं, पूरा प्रीमियम पहले ही भरा जा चुका है |
सटीक शर्त आपके पॉलिसी डॉक्यूमेंट के “Paid-up policy” वाले हिस्से में लिखी होती है। उसे ज़रूर पढ़ें, क्योंकि कुछ प्लान में नियम अलग होते हैं।
LIC पेड-अप वैल्यू का फ़ॉर्मूला
एंडोमेंट जैसे प्लान के लिए बुनियादी फ़ॉर्मूला है:
पेड-अप वैल्यू = बीमा राशि × (भरे गए प्रीमियम ÷ कुल देय प्रीमियम) + जमा बोनस
तीन बातें ध्यान देने लायक हैं:
- अनुपात में प्रीमियम भुगतान अवधि गिनी जाती है, पॉलिसी अवधि नहीं। जीवन लाभ की अवधि 21 साल है लेकिन प्रीमियम सिर्फ 15 साल भरना होता है, इसलिए 7 प्रीमियम भरने पर अनुपात 7/15 होगा, 7/21 नहीं। यानी लिमिटेड प्रीमियम प्लान में पेड-अप वैल्यू तेज़ी से बढ़ती है।
- प्रीमियम अवधि के हिसाब से गिने जाते हैं। मासिक या तिमाही प्रीमियम में LIC देखता है कि कितनी अवधि का प्रीमियम भरा गया, और उसकी तुलना पूरी देय अवधि से करता है।
- मृत्यु और मैच्योरिटी की रकम अलग-अलग घटती है। मैच्योरिटी से पहले मृत्यु होने पर नॉमिनी को डेथ बीमा राशि उसी अनुपात में घटाकर, साथ में जमा बोनस मिलता है।
मनी बैक प्लान में फ़ॉर्मूला थोड़ा बदल जाता है, क्योंकि बीमा राशि का एक हिस्सा पहले ही मिल चुका होता है। LIC के न्यू मनी बैक 20 साल प्लान (920) में मैच्योरिटी पेड-अप बीमा राशि होती है:
(मैच्योरिटी बीमा राशि + सारे सर्वाइवल बेनिफिट) × (भरे गए प्रीमियम ÷ कुल देय प्रीमियम) − पहले मिल चुके सर्वाइवल बेनिफिट
मान लीजिए ₹5 लाख की न्यू मनी बैक 920 पॉलिसी है (15 साल प्रीमियम, 5वें, 10वें और 15वें साल 20% सर्वाइवल बेनिफिट, मैच्योरिटी पर 40%) और 8 प्रीमियम के बाद भुगतान बंद हुआ। तब ₹5,00,000 × 8/15 − पहले मिला ₹1,00,000 = ₹1,66,667, साथ में जमा बोनस। आगे कोई सर्वाइवल बेनिफिट नहीं मिलता।
पेड-अप होने के बाद बोनस का क्या होता है?
सबसे ज़्यादा नुकसान यहीं होता है:
- जमा बोनस बना रहता है। पॉलिसी चालू रहते जुड़ा हर सिंपल रिवर्शनरी बोनस पॉलिसी के साथ रहता है और पेड-अप बीमा राशि के साथ मिलता है।
- नया बोनस बंद। पेड-अप पॉलिसी LIC के मुनाफ़े में हिस्सेदार नहीं रहती, इसलिए बाकी सालों का रिवर्शनरी बोनस नहीं जुड़ता।
- फ़ाइनल एडिशनल बोनस आम तौर पर नहीं मिलता। LIC के ब्रोशर में सामान्यतः लिखा होता है कि पेड-अप पॉलिसी पर FAB देय नहीं है।
- राइडर खत्म। एक्सीडेंट और टर्म राइडर की कोई पेड-अप वैल्यू नहीं बनती।
- लोन फिर भी मिल सकता है। पेड-अप पॉलिसी पर LIC आम तौर पर सरेंडर वैल्यू का 80% तक लोन देता है, जबकि चालू पॉलिसी पर 90% तक।
बोनस शुरू से कैसे जुड़ता है, यह हमारी LIC बोनस कैसे निकलता है गाइड में देखें, या LIC बोनस कैलकुलेटर से अपना अनुमान लगाएँ।
उदाहरण: जीवन लाभ 936 पेड-अप होने पर
एक 35 साल के व्यक्ति ने 2017 में ₹10 लाख बीमा राशि, 21 साल अवधि और 15 साल प्रीमियम वाली जीवन लाभ 936 पॉलिसी ली। हमारे जीवन लाभ 936 कैलकुलेटर के अनुसार सालाना प्रीमियम ₹56,300 है। हमने औसत बोनस ₹45 प्रति ₹1,000 सालाना माना है, जो हमारे कैलकुलेटर का डिफ़ॉल्ट है, LIC की घोषित दर नहीं।
उन्होंने 7 प्रीमियम (2017 से 2023) भरे और फिर भुगतान रोक दिया। पेड-अप वैल्यू:
- पेड-अप बीमा राशि: ₹10,00,000 × 7/15 = ₹4,66,667
- जमा बोनस: ₹45 × 1,000 × 7 साल = ₹3,15,000
- पेड-अप वैल्यू: ₹7,81,667, जो 2038 में मैच्योरिटी पर (56 साल की उम्र में) या पहले मृत्यु होने पर नॉमिनी को मिलेगी
प्रीमियम कब बंद हुए, इसके हिसाब से तस्वीर कैसे बदलती है, यह नीचे देखें। सरेंडर का अनुमान हमारे LIC सरेंडर वैल्यू कैलकुलेटर से है:
| भरे गए प्रीमियम | कुल भुगतान | पेड-अप बीमा राशि | जमा बोनस | मैच्योरिटी पर पेड-अप वैल्यू | अभी सरेंडर वैल्यू (अनुमान) |
|---|---|---|---|---|---|
| 3 | ₹1,68,900 | ₹2,00,000 | ₹1,35,000 | ₹3,35,000 | ₹99,114 |
| 5 | ₹2,81,500 | ₹3,33,333 | ₹2,25,000 | ₹5,58,333 | ₹1,89,127 |
| 7 | ₹3,94,100 | ₹4,66,667 | ₹3,15,000 | ₹7,81,667 | ₹3,03,144 |
| 10 | ₹5,63,000 | ₹6,66,667 | ₹4,50,000 | ₹11,16,667 | ₹5,30,520 |
| 12 | ₹6,75,600 | ₹8,00,000 | ₹5,40,000 | ₹13,40,000 | ₹7,28,871 |
| पूरे 15 (चालू पॉलिसी) | ₹8,44,500 | ₹10,00,000 | ₹9,45,000 + FAB | ₹20,95,000 | — |
आख़िरी पंक्ति पूरी मैच्योरिटी का अनुमान है, जिसमें हमारा कैलकुलेटर ₹1,50,000 का फ़ाइनल एडिशनल बोनस मानता है। 7 प्रीमियम के बाद रुकने पर बाकी ₹4,50,400 प्रीमियम तो बचते हैं, लेकिन मैच्योरिटी पर लगभग ₹13 लाख कम मिलते हैं। यह फ़र्क घटी हुई बीमा राशि, 14 साल के उस बोनस से जो अब कभी नहीं जुड़ेगा, और छूटे FAB से आता है।
पेड-अप बनाम सरेंडर: किसमें ज़्यादा मिलता है?
दोनों विकल्प एक ही रकम से शुरू होते हैं। LIC की स्पेशल सरेंडर वैल्यू असल में पेड-अप वैल्यू को आज की कीमत पर घटाकर निकाली जाती है, क्योंकि आप पैसा कई साल पहले ले रहे हैं।
| पेड-अप रखें | सरेंडर करें | |
|---|---|---|
| रकम | 2038 में मैच्योरिटी पर ₹7,81,667 | अभी लगभग ₹3,03,144 (अनुमान) |
| लाइफ कवर | घटा हुआ कवर 2038 तक चालू | तुरंत खत्म |
| जमा बोनस | पूरा बना रहता है | सिर्फ उसकी नकद वैल्यू मिलती है |
| लोन का विकल्प | सरेंडर वैल्यू का लगभग 80% तक | नहीं |
| बाद में रिवाइवल | हाँ, पहले न भरे प्रीमियम से 5 साल के अंदर | नहीं |
हमारा सरेंडर अनुमान पेड-अप वैल्यू को 7% सालाना से डिस्काउंट करता है, यानी मैच्योरिटी तक रुकना सरेंडर वैल्यू पर लगभग 7% सालाना कमाने जैसा है। यह रिटर्न तय है, जोखिम कम है, और शर्तें पूरी हों तो टैक्स फ्री भी। LIC की असली सरेंडर वैल्यू इससे ज़्यादा या कम हो सकती है, इसलिए कोटेशन ज़रूर लें।
पेड-अप रखना आम तौर पर तब ठीक है जब आपको सिर्फ प्रीमियम का बोझ रोकना है, नकद नहीं चाहिए। सरेंडर तब समझदारी है जब पैसे की अभी ज़रूरत हो, पॉलिसी शुरुआती दौर में हो और उसकी पेड-अप वैल्यू बहुत कम हो, या पैसे का साफ़ तौर पर बेहतर इस्तेमाल हो। GSV और SSV कैसे निकलते हैं, यह हमारी LIC सरेंडर वैल्यू नियम गाइड में समझाया है।
पूरा कवर वापस कैसे पाएँ
पॉलिसी का पेड-अप होना आख़िरी फ़ैसला नहीं है। पहले न भरे प्रीमियम से 5 साल के अंदर और मैच्योरिटी से पहले, सारे बकाया प्रीमियम ब्याज के साथ भरकर और LIC की हेल्थ शर्तें पूरी करके आप इसे रिवाइव कर सकते हैं। पूरी बीमा राशि लौट आती है और बोनस फिर जुड़ने लगता है। अगर आपने कुछ समय की पैसों की तंगी के कारण प्रीमियम रोका था, तो रिवाइवल का खर्च और पेड-अप में होने वाला नुकसान, दोनों की तुलना करें। ब्याज का हिसाब हमारी LIC लैप्स पॉलिसी रिवाइवल गाइड में है।
पेड-अप पॉलिसी पर टैक्स
पेड-अप पॉलिसी से मैच्योरिटी या मृत्यु पर मिली रकम पर बाकी जीवन बीमा भुगतानों जैसा ही नियम लागू होता है। अगर पॉलिसी सामान्य शर्तें पूरी करती है, तो यह आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 11 के साथ अनुसूची II (पहले धारा 10(10D)) के तहत टैक्स फ्री है। शर्तों में शामिल है: अप्रैल 2012 से जारी पॉलिसी में सालाना प्रीमियम बीमा राशि के 10% के अंदर हो, और 1 अप्रैल 2023 से जारी पॉलिसियों में ऐसी सभी पॉलिसियों का कुल सालाना प्रीमियम ₹5 लाख तक हो। डेथ क्लेम हर हाल में टैक्स फ्री है। 22 सितंबर 2025 से व्यक्तिगत जीवन बीमा प्रीमियम पर GST नहीं लगता, लेकिन इससे पेड-अप वैल्यू पर कोई असर नहीं पड़ता।
मुख्य बातें
- पेड-अप वैल्यू बनने के बाद प्रीमियम बंद करने पर पॉलिसी अपने-आप पेड-अप बनती है: पुराने LIC प्लान में आम तौर पर 2 पूरे साल बाद, और 1 अक्टूबर 2024 से जारी प्लान में आम तौर पर 1 साल बाद।
- पेड-अप वैल्यू = बीमा राशि × (भरे गए प्रीमियम ÷ कुल देय प्रीमियम) + जमा बोनस; मनी बैक प्लान में पहले मिल चुके सर्वाइवल बेनिफिट घटाए जाते हैं।
- अनुपात प्रीमियम भुगतान अवधि पर बनता है, इसलिए लिमिटेड प्रीमियम प्लान में ज़्यादा रकम बचती है।
- जमा बोनस बना रहता है, लेकिन नया बोनस, FAB और राइडर बंद हो जाते हैं।
- पेड-अप वैल्यू मैच्योरिटी या मृत्यु पर मिलती है, प्रीमियम बंद करते ही नहीं।
- अगर अभी नकद नहीं चाहिए, तो पेड-अप रखना आम तौर पर सरेंडर से ज़्यादा देता है, और 5 साल के अंदर रिवाइवल से पूरा कवर लौट आता है।
यह एक स्वतंत्र गाइड है; हमारा LIC से कोई संबंध नहीं है। सभी आँकड़े हमारे कैलकुलेटर के अनुमान हैं। अपनी पॉलिसी की सटीक पेड-अप वैल्यू के लिए LIC का कस्टमर पोर्टल देखें या अपनी ब्रांच से पूछें।
ये कैलकुलेटर आज़माएँ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
LIC पॉलिसी कब पेड-अप बनती है?
1 अक्टूबर 2024 से पहले जारी ज़्यादातर LIC प्लान में कम से कम दो पूरे साल का प्रीमियम भरने के बाद प्रीमियम बंद करने पर पॉलिसी पेड-अप बनती है; कुछ पुराने प्लान में तीन साल लगते थे। 1 अक्टूबर 2024 से जारी प्लान में आम तौर पर एक पूरे साल के प्रीमियम के बाद पेड-अप वैल्यू बन जाती है। इससे पहले रुकने पर पॉलिसी लैप्स हो जाती है और कुछ नहीं मिलता।
LIC पेड-अप वैल्यू का फ़ॉर्मूला क्या है?
पेड-अप वैल्यू = बीमा राशि × (भरे गए प्रीमियम की संख्या ÷ कुल देय प्रीमियम की संख्या) + जमा बोनस। इस अनुपात में प्रीमियम भुगतान अवधि गिनी जाती है, पॉलिसी अवधि नहीं। मनी बैक प्लान में पहले सर्वाइवल बेनिफिट जोड़े जाते हैं और जो मिल चुके हैं वे घटा दिए जाते हैं।
क्या पेड-अप LIC पॉलिसी पर बोनस मिलता है?
प्रीमियम भरते समय जुड़ा हर सिंपल रिवर्शनरी बोनस पॉलिसी के साथ बना रहता है, लेकिन पेड-अप होने के बाद नया बोनस नहीं जुड़ता। फ़ाइनल एडिशनल बोनस आम तौर पर पेड-अप पॉलिसी में नहीं मिलता। इसी वजह से पेड-अप वैल्यू पूरी मैच्योरिटी रकम से काफी कम होती है।
पेड-अप वैल्यू कब मिलती है?
मूल मैच्योरिटी तारीख पर, या बीमित व्यक्ति की पहले मृत्यु होने पर नॉमिनी को। पॉलिसी पेड-अप होते ही यह रकम नहीं मिलती। अगर अभी नकद चाहिए, तो पॉलिसी सरेंडर करनी होगी या उस पर लोन लेना होगा।
LIC पॉलिसी पेड-अप रखें या सरेंडर करें?
अगर अभी पैसे की ज़रूरत नहीं है, तो पेड-अप रखना आम तौर पर ज़्यादा देता है, क्योंकि सरेंडर वैल्यू असल में पेड-अप वैल्यू को आज की कीमत पर घटाकर निकाली जाती है। सरेंडर तभी करें जब नकद चाहिए, या पैसा कहीं समान जोखिम पर साफ़ तौर पर ज़्यादा रिटर्न दे सके।
क्या पेड-अप LIC पॉलिसी दोबारा चालू हो सकती है?
हाँ। पहले न भरे प्रीमियम से 5 साल के अंदर, मैच्योरिटी से पहले, सारे बकाया प्रीमियम ब्याज के साथ भरकर और LIC की हेल्थ शर्तें पूरी करके पेड-अप पॉलिसी रिवाइव की जा सकती है। इससे पूरी बीमा राशि और आगे का बोनस वापस मिल जाता है।
अस्वीकरण: LIC प्रीमियम कैलकुलेटर एक स्वतंत्र वेबसाइट है। हमारा भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) से कोई संबंध या समर्थन नहीं है। सभी आंकड़े केवल अनुमान हैं; पॉलिसी लेने से पहले सही प्रीमियम और लाभ LIC या लाइसेंस प्राप्त एजेंट से ज़रूर पुष्टि करें।