गाइड

LIC सरेंडर वैल्यू नियम: कितना पैसा वापस मिलेगा और कब सरेंडर करें

LIC पॉलिसी कब सरेंडर हो सकती है, GSV और SSV कैसे निकलते हैं, 1 अक्टूबर 2024 से क्या बदला, और लोन या पेड-अप विकल्प अक्सर बेहतर क्यों है।

प्रकाशित: 9 मिनट में पढ़ेंLIC Premium Calculators Editorial Team
संक्षिप्त उत्तर

LIC सरेंडर वैल्यू वह रकम है जो पारंपरिक पॉलिसी को बीच में बंद करने पर LIC लौटाता है। यह गारंटीड सरेंडर वैल्यू (भरे प्रीमियम का एक प्रतिशत और बोनस का हिस्सा) और स्पेशल सरेंडर वैल्यू (पेड-अप वैल्यू पर आधारित) में से जो ज़्यादा हो, वह होती है। पुराने प्लान में पहले 2 पूरे साल का प्रीमियम ज़रूरी है। 1 अक्टूबर 2024 से जारी पॉलिसी एक पूरे साल के प्रीमियम के बाद सरेंडर हो सकती है।

LIC सरेंडर वैल्यू वह रकम है जो पारंपरिक LIC पॉलिसी को मैच्योरिटी से पहले बंद करने पर वापस मिलती है। यह गारंटीड सरेंडर वैल्यू (GSV) और स्पेशल सरेंडर वैल्यू (SSV) में से जो ज़्यादा हो, वही होती है, और न्यूनतम अवधि तक प्रीमियम भरने के बाद ही मिलती है। जल्दी सरेंडर करने पर लगभग हमेशा भरे प्रीमियम से कम पैसा लौटता है, इसलिए इस गाइड में नियम, एक उदाहरण और दूसरे विकल्प, तीनों समझाए गए हैं।

LIC पॉलिसी कब सरेंडर कर सकते हैं?

इंतज़ार की अवधि इस पर निर्भर करती है कि पॉलिसी कब जारी हुई:

पॉलिसी का प्रकार सरेंडर वैल्यू कब से मिलती है
1 अक्टूबर 2024 से पहले बिके ज़्यादातर रेगुलर प्रीमियम प्लान (जैसे 9xx और 8xx सीरीज़) 2 पूरे साल का प्रीमियम भरने के बाद
कुछ पुराने प्लान (2014 से पहले के, जैसे जीवन सरल) 3 पूरे साल का प्रीमियम भरने के बाद
1 अक्टूबर 2024 से जारी पॉलिसी (जैसे 7xx वाले नए संस्करण) पहला पॉलिसी वर्ष पूरा होने पर, एक पूरे साल का प्रीमियम भरा हो
सिंगल प्रीमियम पॉलिसी प्रीमियम भरने के बाद, पॉलिसी शर्तों के अनुसार

इससे पहले सरेंडर करने पर आम तौर पर कुछ नहीं मिलता। नई पॉलिसी को फ्री-लुक पीरियड में लौटाया जा सकता है, जिसे IRDAI के 2024 के नियमों ने 15 से बढ़ाकर 30 दिन कर दिया है। इसमें मामूली कटौती के बाद प्रीमियम वापस मिल जाता है, जो बाद में सरेंडर करने से कहीं बेहतर है।

टर्म प्लान (डिजी टर्म, न्यू जीवन अमर) के रेगुलर प्रीमियम वर्ज़न में सरेंडर वैल्यू नहीं बनती, क्योंकि उनमें बचत का हिस्सा नहीं होता।

GSV और SSV: दो तरह की सरेंडर वैल्यू

गारंटीड सरेंडर वैल्यू (GSV) वह न्यूनतम रकम है जिसका पॉलिसी वादा करती है। आम तौर पर यह होती है:

  • GSV फैक्टर (एक प्रतिशत) × कुल भरा गया प्रीमियम, जिसमें एक्स्ट्रा प्रीमियम, राइडर प्रीमियम और टैक्स शामिल नहीं (कई पुराने LIC प्लान में पहले साल का प्रीमियम भी नहीं गिना जाता), और साथ में
  • जमा बोनस का नकद मूल्य, जो बोनस का सिर्फ छोटा हिस्सा होता है।

शुरुआती सालों में GSV फैक्टर कम होता है, आम तौर पर लगभग 30%, और पॉलिसी जितनी चलती है यह बढ़ता जाता है, अवधि के आख़िर तक लगभग 90% तक।

स्पेशल सरेंडर वैल्यू (SSV) LIC खुद निकालता है और कुछ साल बाद आम तौर पर यही ज़्यादा होती है। इसकी शुरुआत पेड-अप वैल्यू (नीचे समझाया है) से होती है, जिसे आज की कीमत पर डिस्काउंट किया जाता है, क्योंकि आप पैसा मैच्योरिटी की जगह अभी ले रहे हैं। LIC समय-समय पर SSV फैक्टर बदल सकता है।

LIC GSV और SSV में से जो ज़्यादा हो, वही देता है।

पेड-अप वैल्यू: सिर्फ प्रीमियम बंद करने पर क्या होता है

सरेंडर वैल्यू बनने के बाद प्रीमियम बंद करने पर पॉलिसी पूरी तरह लैप्स नहीं होती। वह घटी हुई बीमा राशि के साथ पेड-अप पॉलिसी बन जाती है:

पेड-अप वैल्यू = बीमा राशि × (भरे गए प्रीमियम ÷ कुल देय प्रीमियम) + अब तक जमा बोनस

पेड-अप वैल्यू मैच्योरिटी पर, या पहले मृत्यु होने पर, मिलती है। पेड-अप पॉलिसी में आम तौर पर नया बोनस जुड़ना बंद हो जाता है और राइडर भी खत्म हो जाते हैं। SSV असल में इसी पेड-अप वैल्यू को आज के पैसे में बदलकर निकाली जाती है।

1 अक्टूबर 2024 से क्या बदला

IRDAI ने 12 जून 2024 को लाइफ इंश्योरेंस प्रोडक्ट्स पर मास्टर सर्कुलर जारी किया और कंपनियों को 30 सितंबर 2024 तक अपने प्रोडक्ट बदलने का समय दिया। 1 अक्टूबर 2024 से नई नॉन-लिंक्ड बचत पॉलिसियों पर ये नियम लागू हैं:

  • पहला पॉलिसी वर्ष पूरा होने और एक पूरे साल का प्रीमियम भरने के बाद सरेंडर वैल्यू मिलती है। पहले ज़्यादातर पॉलिसियों में पहले दो साल में सरेंडर करने पर कुछ नहीं मिलता था।
  • पाँच साल से कम प्रीमियम भुगतान अवधि वाली पॉलिसी में एक साल के प्रीमियम के बाद, और सिंगल प्रीमियम पॉलिसी में प्रीमियम भरने के बाद सरेंडर वैल्यू मिलती है।
  • SSV कम से कम पेड-अप बीमा राशि, पेड-अप भविष्य के लाभ और जमा बोनस के अपेक्षित वर्तमान मूल्य के बराबर होनी चाहिए, पहले मिल चुके सर्वाइवल बेनिफिट को घटाकर।
  • इसके लिए इस्तेमाल होने वाली डिस्काउंट दर 10 साल के सरकारी बॉन्ड यील्ड से 0.5 प्रतिशत अंक से ज़्यादा नहीं हो सकती, ताकि ऊँची डिस्काउंट दर से SSV कम न की जा सके।
  • सरेंडर वैल्यू देने वाले नॉन-लिंक्ड बचत प्लान में पॉलिसी लोन की सुविधा भी देनी होगी।

इन नियमों के अनुसार LIC ने अक्टूबर 2024 में अपने मुख्य प्लान 7xx संस्करण के रूप में दोबारा लॉन्च किए। नए नियम सिर्फ 1 अक्टूबर 2024 या उसके बाद जारी पॉलिसियों पर लागू हैं। अगर आपकी LIC पॉलिसी इससे पहले की है, तो उसकी सरेंडर वैल्यू आपकी मूल पॉलिसी शर्तों से ही तय होगी।

उदाहरण: ₹5 लाख की पॉलिसी सरेंडर करना

30 साल के एक व्यक्ति ने ₹5 लाख बीमा राशि और 20 साल की अवधि के लिए न्यू एंडोमेंट प्लान 914 लिया। हमारे न्यू एंडोमेंट 914 कैलकुलेटर के अनुसार सालाना प्रीमियम ₹24,470 है। औसत बोनस ₹40 प्रति ₹1,000 मानकर LIC सरेंडर वैल्यू कैलकुलेटर का अनुमान:

प्रीमियम भरे साल कुल भरा प्रीमियम GSV SSV (अनुमान) सरेंडर वैल्यू प्रीमियम का कितना % वापस
2 ₹48,940 ₹13,341 ₹26,628 ₹26,628 54%
3 ₹73,410 ₹23,682 ₹42,738 ₹42,738 58%
5 ₹1,22,350 ₹63,940 ₹81,550 ₹81,550 67%
7 ₹1,71,290 ₹1,23,774 ₹1,30,714 ₹1,30,714 76%
10 ₹2,44,700 ₹2,28,207 ₹2,28,757 ₹2,28,757 93%
15 ₹3,67,050 ₹3,53,322 ₹4,81,266 ₹4,81,266 131%

7वें साल को देखें। पॉलिसीधारक ₹1,71,290 भर चुका है और सरेंडर करने पर लगभग ₹1,30,714 मिलेंगे, यानी करीब ₹40,576 का नुकसान। वही पॉलिसी पेड-अप करने पर ₹3,15,000 की पेड-अप वैल्यू बनती है (₹5 लाख × 7/20 = ₹1,75,000, साथ में ₹1,40,000 जमा बोनस), जो 13 साल बाद मैच्योरिटी पर मिलेगी। पॉलिसी चालू रखते हुए लगभग ₹1,17,642 तक का लोन भी लिया जा सकता है।

हमारा कैलकुलेटर पेड-अप वैल्यू को 7% सालाना की मानी गई दर से डिस्काउंट करके SSV का अनुमान लगाता है। LIC के असली SSV फैक्टर प्लान के हिसाब से अलग होते हैं और समय के साथ बदलते हैं, इसलिए फ़ैसले से पहले LIC से सही कोटेशन ज़रूर लें।

सुझाव: बाद के सालों में वापस मिलने वाला हिस्सा तेज़ी से बढ़ता है। अगर पॉलिसी आधी अवधि पार कर चुकी है, तो सरेंडर शायद ही सबसे अच्छा विकल्प होता है।

सरेंडर की जगह दूसरे विकल्प

सरेंडर फ़ॉर्म पर साइन करने से पहले इन विकल्पों से तुलना करें:

  1. पॉलिसी लोन। पॉलिसी पर लोन लें, चालू पॉलिसी में आम तौर पर सरेंडर वैल्यू के 90% तक। कवर और बोनस जारी रहते हैं। ब्याज लगता है और बकाया लोन क्लेम से काट लिया जाता है। विस्तार से जानने के लिए हमारी LIC पॉलिसी पर लोन गाइड पढ़ें।
  2. पॉलिसी पेड-अप करें। प्रीमियम बंद करें और घटी हुई बीमा राशि व जमा बोनस को मैच्योरिटी तक रहने दें। यह तब ठीक है जब आपको एकमुश्त रकम नहीं, बल्कि हर महीने के खर्च में राहत चाहिए।
  3. असाइनमेंट। पॉलिसी को लोन की गारंटी के तौर पर बैंक के नाम असाइन कर सकते हैं, या कीमत लेकर किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफ़र कर सकते हैं। अगर LIC को असाइनमेंट सही नीयत से या पॉलिसीधारक के हित में न लगे, तो वह इसे मना कर सकता है। पुरानी पॉलिसी खरीदने वाले कम हैं, इसलिए यह रास्ता तभी देखें जब सरेंडर वैल्यू बहुत कम हो।
  4. बाद में रिवाइवल। अगर पैसों की तंगी से पॉलिसी लैप्स हो गई है, तो LIC आम तौर पर तय अवधि के अंदर बकाया प्रीमियम और ब्याज भरकर पॉलिसी चालू करने देता है।

अगर आपको सिर्फ कुछ पैसों की ज़रूरत है, तो फ़ैसले से पहले मैच्योरिटी कैलकुलेटर और बोनस कैलकुलेटर से लोन और पेड-अप वैल्यू की तुलना करें। पॉलिसी में बोनस कैसे जुड़ता है, यह जानने के लिए हमारी LIC बोनस कैसे कैलकुलेट होता है गाइड देखें।

LIC सरेंडर वैल्यू पर टैक्स

नीचे दी गई धाराएँ आयकर अधिनियम, 1961 की हैं। 1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम, 2025 लागू है, जिसमें ये नियम नए धारा नंबरों के साथ आगे जारी हैं, इसलिए मौजूदा धारा किसी टैक्स सलाहकार से पक्की कर लें।

  • 80C छूट की वापसी। अगर दो साल का प्रीमियम भरने से पहले पॉलिसी बंद करते हैं, तो पहले ली गई 80C छूट सरेंडर वाले साल की आय में वापस जोड़ दी जाती है।
  • धारा 10(10D) की छूट। अगर किसी भी साल प्रीमियम बीमा राशि के 10% से ज़्यादा नहीं रहा (अप्रैल 2003 से मार्च 2012 के बीच जारी पॉलिसी में 20%), तो सरेंडर राशि टैक्स फ्री है। 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद जारी नॉन-ULIP पॉलिसियों में यह भी ज़रूरी है कि ऐसी सभी पॉलिसियों का कुल सालाना प्रीमियम ₹5 लाख या कम हो।
  • छूट न मिले तो सिर्फ आय वाला हिस्सा (मिली रकम में से भरा प्रीमियम घटाकर) टैक्सेबल है। LIC इस हिस्से पर 2% TDS काटता है, जो दर 1 अक्टूबर 2024 से लागू है (पहले 5% थी)। साल भर में कुल भुगतान ₹1 लाख से कम हो तो TDS नहीं कटता।

22 सितंबर 2025 से व्यक्तिगत जीवन बीमा प्रीमियम GST-मुक्त हैं, इसलिए नई रसीदों पर GST नहीं लगता। पुरानी रसीदों पर भरा गया GST सरेंडर पर वापस नहीं मिलता।

मुख्य बातें

  • सरेंडर वैल्यू = GSV और SSV में से ज़्यादा, जो ज़्यादातर पुराने LIC प्लान में 2 पूरे साल के प्रीमियम के बाद मिलती है।
  • 1 अक्टूबर 2024 से जारी पॉलिसियों में एक पूरे साल के प्रीमियम के बाद सरेंडर वैल्यू मिलती है, और SSV पेड-अप वैल्यू से जुड़ी है।
  • जल्दी सरेंडर करने पर आम तौर पर भरे प्रीमियम का सिर्फ 50–70% लौटता है, बाद में कहीं ज़्यादा।
  • पॉलिसी लोन या पेड-अप विकल्प आम तौर पर सरेंडर से ज़्यादा मूल्य बचाते हैं।
  • सरेंडर से पहले धारा 10(10D) की शर्तें और दो साल वाला 80C नियम ज़रूर जाँचें।

ये आँकड़े हमारे स्वतंत्र कैलकुलेटर के अनुमान हैं, LIC के कोटेशन नहीं। अपनी पॉलिसी की सही सरेंडर वैल्यू के लिए अपनी LIC शाखा से पूछें या LIC के कस्टमर पोर्टल पर देखें।

ये कैलकुलेटर आज़माएँ

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

LIC पॉलिसी कब सरेंडर कर सकते हैं?

1 अक्टूबर 2024 से पहले बिके ज़्यादातर LIC प्लान में कम से कम दो पूरे साल का प्रीमियम भरना ज़रूरी है। 2014 से पहले के कुछ प्लान में तीन साल लगते थे। IRDAI के नए नियमों के तहत 1 अक्टूबर 2024 से जारी पॉलिसी में एक पूरे साल का प्रीमियम भरने के बाद सरेंडर वैल्यू मिलती है।

GSV और SSV में क्या अंतर है?

GSV (गारंटीड सरेंडर वैल्यू) पॉलिसी में लिखे फ़ॉर्मूले से तय न्यूनतम रकम है: भरे गए प्रीमियम का एक प्रतिशत और जमा बोनस का छोटा हिस्सा। SSV (स्पेशल सरेंडर वैल्यू) LIC खुद निकालता है, जो पेड-अप बीमा राशि और बोनस पर आधारित होती है। LIC इन दोनों में से ज़्यादा रकम देता है।

5 साल बाद LIC पॉलिसी सरेंडर करने पर कितना मिलेगा?

यह प्लान, प्रीमियम और बोनस पर निर्भर है। ₹24,470 सालाना प्रीमियम वाली ₹5 लाख की न्यू एंडोमेंट 914 पॉलिसी पर हमारा कैलकुलेटर 5 साल बाद लगभग ₹81,550 का अनुमान देता है, यानी भरे गए ₹1,22,350 का करीब 67%। अपने आँकड़ों के लिए सरेंडर वैल्यू कैलकुलेटर इस्तेमाल करें।

क्या LIC सरेंडर वैल्यू पर टैक्स लगता है?

अगर पॉलिसी धारा 10(10D) की शर्तें पूरी करती है, जैसे प्रीमियम बीमा राशि के 10% के अंदर हो और 1 अप्रैल 2023 से जारी पॉलिसी में कुल सालाना प्रीमियम ₹5 लाख तक हो, तो सरेंडर राशि टैक्स फ्री है। दो साल के अंदर सरेंडर करने पर पहले ली गई 80C छूट भी वापस जुड़ सकती है।

सरेंडर करना बेहतर है या पॉलिसी पेड-अप करना?

अगर पॉलिसी कुछ साल चल चुकी है और अभी नकद की ज़रूरत नहीं है, तो पेड-अप करना आम तौर पर बाद में ज़्यादा पैसा देता है। घटी हुई बीमा राशि और जमा बोनस मैच्योरिटी पर मिलते हैं। सरेंडर तभी समझदारी है जब पैसे की सख़्त ज़रूरत हो या पॉलिसी सच में आपके काम की न हो।

क्या सरेंडर की जगह LIC पॉलिसी पर लोन ले सकते हैं?

हाँ। पॉलिसी में सरेंडर वैल्यू बनने के बाद LIC उस पर लोन देता है, चालू पॉलिसी पर आम तौर पर सरेंडर वैल्यू के 90% तक। आपका कवर और बोनस जारी रहते हैं, और लोन न चुकाने पर मूलधन और ब्याज क्लेम से काट लिया जाता है।

अस्वीकरण: LIC प्रीमियम कैलकुलेटर एक स्वतंत्र वेबसाइट है। हमारा भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) से कोई संबंध या समर्थन नहीं है। सभी आंकड़े केवल अनुमान हैं; पॉलिसी लेने से पहले सही प्रीमियम और लाभ LIC या लाइसेंस प्राप्त एजेंट से ज़रूर पुष्टि करें।

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