2026 में LIC के तीन चाइल्ड प्लान बिक रहे हैं। एक ही बच्चे और एक ही बीमा राशि पर उनकी उम्र सीमा, प्रीमियम अवधि, पेआउट और प्रीमियम वेवर राइडर की तुलना।
LIC टैक्स बेनिफिट के दो हिस्से हैं। प्रीमियम पर आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 123 (पहले धारा 80C) में ₹1.5 लाख तक कटौती मिलती है, सिर्फ पुरानी व्यवस्था में। मैच्योरिटी और डेथ क्लेम आम तौर पर धारा 11 व अनुसूची II (पहले धारा 10(10D)) में टैक्स-फ्री हैं, अगर प्रीमियम बीमा राशि के 10% के भीतर हो और 1 अप्रैल 2023 से जारी पॉलिसियों का कुल सालाना प्रीमियम ₹5 लाख से ज़्यादा न हो।
LIC टैक्स बेनिफिट दो तरह से मिलता है: भरे गए प्रीमियम पर कटौती और मिलने वाली रकम पर छूट। 1 अप्रैल 2026 से ये दोनों आयकर अधिनियम, 2025 से तय होते हैं, जिसने 1961 के कानून की जगह ली है और पुरानी रसीदों पर दिखने वाली हर धारा का नंबर बदल दिया है। नियम ज़्यादातर वही हैं, लेकिन कटौती सिर्फ पुरानी टैक्स व्यवस्था में मिलती है और कुछ शर्तें मैच्योरिटी को भी टैक्सेबल बना सकती हैं।
यह एक स्वतंत्र वेबसाइट की सामान्य जानकारी है, टैक्स सलाह नहीं। अपने रिटर्न के लिए किसी योग्य टैक्स सलाहकार से बात करें।
पुरानी और नई धाराएं एक नज़र में
नया कानून आय को “टैक्स ईयर” के हिसाब से गिनता है और ज़्यादातर जानी-पहचानी धाराओं के नंबर बदल गए हैं। LIC पॉलिसीधारकों के काम की धाराएं इस तरह बदली हैं:
| किस बारे में | आयकर अधिनियम, 1961 | आयकर अधिनियम, 2025 |
|---|---|---|
| जीवन बीमा प्रीमियम पर कटौती | धारा 80C | धारा 123 |
| LIC पेंशन प्लान योगदान पर कटौती | धारा 80CCC | धारा 123 |
| मैच्योरिटी और डेथ क्लेम पर छूट | धारा 10(10D) | धारा 11 व अनुसूची II |
| हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम पर कटौती | धारा 80D | धारा 126 |
| टैक्सेबल पॉलिसी भुगतान पर TDS | धारा 194DA | धारा 393 |
31 मार्च 2026 तक भरे गए प्रीमियम 1961 के कानून वाले आखिरी साल में आते हैं, इसलिए उस साल के रिटर्न में धारा 80C ही चलेगी। 1 अप्रैल 2026 से भरे प्रीमियम धारा 123 में आएंगे।
प्रीमियम पर कटौती: धारा 123
LIC पॉलिसी के प्रीमियम पर आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 123 (पहले धारा 80C) में कटौती मिलती है। मुख्य बातें:
- सीमा: साल में कुल ₹1.5 लाख तक, जो PPF, EPF, ELSS, होम लोन के मूलधन, ट्यूशन फीस जैसी इसी धारा की दूसरी मदों के साथ साझा है।
- किसकी पॉलिसी: अपनी, पति/पत्नी की या बच्चों की ज़िंदगी पर ली गई पॉलिसी। HUF अपने किसी भी सदस्य की पॉलिसी पर दावा कर सकता है।
- पेंशन प्लान: LIC पेंशन या एन्युटी प्लान का योगदान, जो पहले धारा 80CCC में आता था, अब धारा 123 में इसी कुल सीमा के भीतर आता है। बाद में मिलने वाली पेंशन या एन्युटी आय मानी जाती है और उस पर टैक्स लगता है।
- लॉक-इन: अगर दो साल का प्रीमियम भरने से पहले पॉलिसी मृत्यु के अलावा किसी कारण से बंद हो जाए, तो ली गई कटौती उसी साल आय में जुड़ जाती है।
बीमा राशि के मुकाबले प्रीमियम की सीमा
कटौती हमेशा पूरे प्रीमियम पर नहीं मिलती। सालाना प्रीमियम का सिर्फ वह हिस्सा गिना जाता है जो बीमा राशि के तय प्रतिशत तक हो:
| पॉलिसी कब जारी हुई | कटौती योग्य प्रीमियम की सीमा |
|---|---|
| 1 अप्रैल 2003 से 31 मार्च 2012 | बीमा राशि का 20% |
| 1 अप्रैल 2012 या उसके बाद | बीमा राशि का 10% |
| 1 अप्रैल 2013 या बाद, बीमित व्यक्ति को निर्दिष्ट विकलांगता या बीमारी | बीमा राशि का 15% |
यही प्रतिशत तय करते हैं कि मैच्योरिटी टैक्स-फ्री होगी या नहीं, इसलिए ऊंचे प्रीमियम और सिंगल प्रीमियम प्लान में खास ध्यान चाहिए।
पुरानी बनाम नई टैक्स व्यवस्था
नई टैक्स व्यवस्था अब डिफ़ॉल्ट है। इसमें स्लैब रेट कम हैं, लेकिन धारा 123 की कटौती नहीं मिलती और धारा 126 की हेल्थ इंश्योरेंस कटौती भी नहीं। प्रीमियम पर LIC टैक्स बेनिफिट लेना है तो रिटर्न भरते समय पुरानी व्यवस्था चुननी होगी। यह फायदेमंद है या नहीं, यह आपकी आय और HRA, होम लोन ब्याज, हेल्थ कवर जैसी दूसरी कटौतियों पर निर्भर है। फैसले से पहले दोनों व्यवस्थाओं में टैक्स की तुलना करें या अपने टैक्स सलाहकार से करवाएं।
मैच्योरिटी की छूट अलग मामला है। अनुसूची II आय को छूट देती है, उसमें से कटौती नहीं करती, इसलिए शर्तें पूरी करने वाली मैच्योरिटी आम तौर पर किसी भी व्यवस्था में टैक्स-फ्री रहती है।
टैक्स-फ्री मैच्योरिटी: धारा 11 व अनुसूची II
बोनस समेत मैच्योरिटी और सर्वाइवल बेनिफिट आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 11 व अनुसूची II (पहले धारा 10(10D)) में टैक्स-फ्री हैं, अगर ये शर्तें पूरी हों:
- प्रीमियम सीमा के भीतर। पॉलिसी अवधि के किसी भी साल सालाना प्रीमियम बीमा राशि के 10% से ज़्यादा न रहा हो (1 अप्रैल 2003 से 31 मार्च 2012 की पॉलिसी में 20%, ऊपर बताए विकलांगता वाले मामले में 15%)।
- ₹5 लाख का कुल प्रीमियम नियम। 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद जारी पारंपरिक (नॉन-ULIP) पॉलिसियों में, अगर ऐसी सभी पॉलिसियों का कुल सालाना प्रीमियम ₹5 लाख से ज़्यादा है, तो छूट खत्म हो जाती है। इससे पहले की पॉलिसियां नहीं गिनी जातीं। कई पॉलिसियां हों तो नियम आपको यह चुनने देते हैं कि किन्हें छूट वाली माना जाए, ताकि उनका जोड़ ₹5 लाख के भीतर रहे।
- ULIP की अलग सीमा। 1 फरवरी 2021 या उसके बाद जारी ULIP में छूट तभी है जब सालाना प्रीमियम ₹2.5 लाख के भीतर हो।
शर्तें पूरी न होने पर सिर्फ आय वाले हिस्से पर टैक्स लगता है: मोटे तौर पर मिली रकम में से वह प्रीमियम घटाकर जिस पर कटौती नहीं ली गई। डेथ क्लेम हर हाल में टैक्स-फ्री है।
हेल्थ कवर: धारा 126
अगर आपके पास LIC की हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी है, तो उसका प्रीमियम धारा 123 में नहीं, आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 126 (पहले धारा 80D) में आता है। आम तौर पर खुद, पति/पत्नी और बच्चों के लिए साल में ₹25,000 (वरिष्ठ नागरिक हों तो ₹50,000) और माता-पिता के लिए अलग सीमा होती है। यह भी पुरानी व्यवस्था की कटौती है और प्रीमियम नकद के अलावा किसी तरीके से भरा होना चाहिए।
आय वाले हिस्से पर TDS: धारा 393
भुगतान टैक्स-फ्री न हो, तो LIC आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 393 (पहले धारा 194DA) के तहत TDS काटती है:
- रेट: आय वाले हिस्से (भुगतान में से कुल भरा प्रीमियम घटाकर) का 2%, पूरी रकम का नहीं।
- सीमा: साल भर में ऐसे कुल भुगतान ₹1 लाख से कम हों तो TDS नहीं।
- PAN न हो तो: ज़्यादा रेट से कटौती होती है, इसलिए LIC में अपना PAN अपडेट रखें।
- डेथ क्लेम: TDS नहीं, क्योंकि यह टैक्स-फ्री है।
TDS सिर्फ एडवांस टैक्स है। यह आय आपकी कुल आय में जुड़कर स्लैब रेट से टैक्स होती है, और फॉर्म 26AS या वार्षिक सूचना विवरण (AIS) में दिखा TDS अंतिम टैक्स में घट जाता है।
उदाहरण: दो LIC पॉलिसी, दो अलग नतीजे
ये आंकड़े हमारे कैलकुलेटर से निकाले गए अनुमान हैं, डिफ़ॉल्ट बोनस मानकर।
पॉलिसी A: जीवन लाभ 736। उम्र 30, 21 साल की अवधि, ₹10 लाख बीमा राशि, 15 साल प्रीमियम। जीवन लाभ 736 कैलकुलेटर के अनुसार सालाना प्रीमियम ₹55,505, कुल प्रीमियम ₹8,32,575 और अनुमानित मैच्योरिटी ₹21,39,500 है।
- प्रीमियम बीमा राशि का 5.55% है, 10% के भीतर, इसलिए पूरे ₹55,505 पर धारा 123 की कटौती मिलेगी।
- पुरानी व्यवस्था में 30% स्लैब वाले को हर साल लगभग ₹17,318 की बचत (₹55,505 × 30%, ऊपर से 4% सेस, सरचार्ज छोड़कर)। 20% स्लैब में बचत लगभग ₹11,545।
- सालाना प्रीमियम ₹5 लाख से काफी कम है, इसलिए अगर 1 अप्रैल 2023 के बाद की यही अकेली पॉलिसी है, तो ₹21,39,500 टैक्स-फ्री होगा और TDS नहीं कटेगा।
पॉलिसी B: सिंगल प्रीमियम एंडोमेंट 717। उम्र 35, 20 साल की अवधि, ₹5 लाख बीमा राशि। सिंगल प्रीमियम एंडोमेंट 717 कैलकुलेटर के अनुसार सिंगल प्रीमियम ₹2,73,974 और अनुमानित मैच्योरिटी ₹9,07,500 है।
- प्रीमियम बीमा राशि का लगभग 55% है। भुगतान वाले साल में धारा 123 के लिए सिर्फ ₹50,000 (₹5 लाख का 10%) गिना जाएगा।
- 10% की शर्त पूरी नहीं होती, इसलिए मैच्योरिटी टैक्स-फ्री नहीं है। आय वाला हिस्सा लगभग ₹9,07,500 − ₹2,73,974 = ₹6,33,526 है।
- LIC लगभग ₹12,671 (2%) TDS काटेगी। फिर पूरे ₹6,33,526 पर रिटर्न में आपके स्लैब से टैक्स लगेगा और TDS उसमें घट जाएगा।
सुझाव: “टैक्स बचत” के नाम पर सिंगल या ऊंचे प्रीमियम वाला प्लान लेने से पहले देखें कि प्रीमियम बीमा राशि का कितना प्रतिशत है। 10% से ऊपर जाते ही कटौती और टैक्स-फ्री मैच्योरिटी दोनों घट जाती हैं।
दूसरे प्लान LIC मैच्योरिटी कैलकुलेटर में जांचें।
LIC के कौन से भुगतान टैक्सेबल हैं?
| भुगतान | आम तौर पर टैक्स |
|---|---|
| नॉमिनी को डेथ क्लेम | हर हाल में टैक्स-फ्री |
| मैच्योरिटी या सर्वाइवल बेनिफिट, शर्तें पूरी | अनुसूची II में टैक्स-फ्री |
| मैच्योरिटी, प्रीमियम बीमा राशि के 10% (या 20%) से ज़्यादा | आय वाले हिस्से पर टैक्स, 2% TDS |
| मैच्योरिटी, अप्रैल 2023 के बाद की पॉलिसियों का कुल प्रीमियम ₹5 लाख से ज़्यादा | आय वाले हिस्से पर टैक्स, 2% TDS |
| सरेंडर वैल्यू | अनुसूची II की शर्तें पूरी तो टैक्स-फ्री, वरना आय वाले हिस्से पर टैक्स |
| पेंशन या एन्युटी की किस्तें (जैसे न्यू जीवन शांति 758) | हर साल आय मानकर टैक्स |
प्योर टर्म प्लान में आम तौर पर सवाल नहीं उठता: प्रीमियम कवर के मुकाबले छोटा होता है, धारा 123 में गिना जाता है और क्लेम डेथ क्लेम ही होता है। कवर की तुलना टर्म प्लान कैलकुलेटर में करें।
आम गलतियां
- नई व्यवस्था चुनकर भी प्रीमियम कटौती की उम्मीद। वहां यह कटौती नहीं है।
- ₹5 लाख नियम को भूल जाना। इसमें 1 अप्रैल 2023 से ली गई आपकी सभी नॉन-ULIP पॉलिसियां गिनी जाती हैं, सिर्फ एक नहीं।
- TDS को ही अंतिम टैक्स मान लेना। आय वाले हिस्से पर स्लैब रेट से टैक्स लगता है; 2% सिर्फ एडवांस है।
- पहले दो साल में सरेंडर। ली गई कटौती पलट जाती है। पहले LIC सरेंडर वैल्यू नियम पढ़ें।
- GST और इनकम टैक्स को मिलाना। 22 सितंबर 2025 से व्यक्तिगत जीवन बीमा प्रीमियम GST मुक्त है; देखें LIC प्रीमियम पर GST। उस बदलाव से ऊपर के इनकम टैक्स नियमों पर कोई असर नहीं पड़ा।
कटौती के सबूत के तौर पर प्रीमियम पेड स्टेटमेंट LIC कस्टमर पोर्टल रजिस्ट्रेशन के बाद डाउनलोड कर सकते हैं।
मुख्य बातें
- 1 अप्रैल 2026 से LIC प्रीमियम की कटौती धारा 123 (पहले 80C और 80CCC) में है, साल में ₹1.5 लाख तक, सिर्फ पुरानी व्यवस्था में।
- 1 अप्रैल 2012 से जारी पॉलिसियों में कटौती योग्य प्रीमियम बीमा राशि के 10% तक सीमित है।
- प्रीमियम सीमा पूरी हो और अप्रैल 2023 के बाद की नॉन-ULIP पॉलिसियों का कुल सालाना प्रीमियम ₹5 लाख के भीतर हो, तो मैच्योरिटी धारा 11 व अनुसूची II (पहले 10(10D)) में टैक्स-फ्री है।
- डेथ क्लेम हमेशा टैक्स-फ्री है।
- टैक्सेबल भुगतान पर धारा 393 (पहले 194DA) में आय वाले हिस्से पर 2% TDS कटता है, अंतिम टैक्स स्लैब रेट से।
- हर फाइनेंस एक्ट के साथ टैक्स नियम बदल सकते हैं। कोई कदम उठाने से पहले अपने मामले में टैक्स सलाहकार से पुष्टि करें।
ये कैलकुलेटर आज़माएँ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
80C की जगह अब LIC प्रीमियम कटौती किस धारा में है?
1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम, 2025 ने 1961 के कानून की जगह ली है। LIC प्रीमियम की कटौती, जो पहले धारा 80C में थी, अब धारा 123 में है। LIC पेंशन प्लान का योगदान, जो पहले 80CCC में था, वह भी धारा 123 में आता है। कुल सीमा ₹1.5 लाख ही है और कटौती सिर्फ पुरानी व्यवस्था में मिलती है।
क्या नई टैक्स व्यवस्था में LIC प्रीमियम की कटौती मिलती है?
नहीं। नई व्यवस्था, जो अब डिफ़ॉल्ट है, में LIC प्रीमियम पर धारा 123 और हेल्थ इंश्योरेंस पर धारा 126 की कटौती नहीं मिलती। इसके लिए रिटर्न भरते समय पुरानी व्यवस्था चुननी होगी। अनुसूची II की मैच्योरिटी छूट अलग चीज़ है: यह कटौती नहीं, छूट है, इसलिए आम तौर पर दोनों व्यवस्थाओं में मिलती है।
क्या LIC की मैच्योरिटी राशि टैक्स-फ्री है?
ज़्यादातर मामलों में हां। आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 11 व अनुसूची II (पहले धारा 10(10D)) में छूट मिलती है, अगर सालाना प्रीमियम बीमा राशि के 10% से ज़्यादा न रहा हो (1 अप्रैल 2003 से 31 मार्च 2012 के बीच की पॉलिसी में 20%)। 1 अप्रैल 2023 से जारी नॉन-ULIP पॉलिसियों में कुल सालाना प्रीमियम ₹5 लाख के भीतर भी होना चाहिए।
क्या LIC डेथ क्लेम पर टैक्स लगता है?
नहीं। बीमित व्यक्ति की मृत्यु पर नॉमिनी को मिलने वाली राशि पूरी तरह टैक्स-फ्री है, प्रीमियम कितना भी हो और पॉलिसी कभी भी ली गई हो। 10% प्रीमियम की शर्त और ₹5 लाख का नियम डेथ क्लेम पर लागू नहीं होते।
LIC मैच्योरिटी पर कितना TDS काटती है?
अगर भुगतान टैक्स-फ्री नहीं है, तो LIC आयकर अधिनियम, 2025 की धारा 393 (पहले धारा 194DA) के तहत आय वाले हिस्से पर 2% TDS काटती है, यानी भुगतान में से कुल भरा प्रीमियम घटाकर बची रकम पर। साल भर में ऐसे कुल भुगतान ₹1 लाख से कम हों तो TDS नहीं कटता। अंतिम टैक्स आपके स्लैब रेट से लगता है।
दो साल के भीतर पॉलिसी सरेंडर करने पर क्या होता है?
अगर दो साल का प्रीमियम भरने से पहले पॉलिसी मृत्यु के अलावा किसी वजह से बंद हो जाए, तो उस पर ली गई धारा 123 की कटौती उसी साल आपकी आय में वापस जोड़ दी जाती है। अगर पॉलिसी अनुसूची II की शर्तें पूरी नहीं करती, तो सरेंडर वैल्यू पर भी टैक्स लग सकता है।
क्या LIC टैक्स प्लानिंग के लिए टैक्स सलाहकार ज़रूरी है?
सीधे-सादे मामलों में इस गाइड से अपनी स्थिति समझी जा सकती है। लेकिन अगर अप्रैल 2023 के बाद कई पॉलिसियां ली हैं, प्रीमियम बड़ा या सिंगल है, या पुरानी-नई व्यवस्था में चुनना है, तो किसी योग्य टैक्स सलाहकार या CA से अपने आंकड़े जंचवाएं। यह गाइड सामान्य जानकारी है, टैक्स सलाह नहीं।
अस्वीकरण: LIC प्रीमियम कैलकुलेटर एक स्वतंत्र वेबसाइट है। हमारा भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) से कोई संबंध या समर्थन नहीं है। सभी आंकड़े केवल अनुमान हैं; पॉलिसी लेने से पहले सही प्रीमियम और लाभ LIC या लाइसेंस प्राप्त एजेंट से ज़रूर पुष्टि करें।