कोई एक LIC पॉलिसी सबके लिए बेस्ट नहीं होती। टर्म कवर से पेंशन तक, हर लक्ष्य के लिए अभी बिक रहे LIC प्लान और उनके असली प्रीमियम उदाहरण।
LIC पॉलिसी मैच्योर होने से लगभग दो महीने पहले सर्विसिंग ब्रांच एक सूचना पत्र के साथ डिस्चार्ज फॉर्म (आमतौर पर फॉर्म 3825) भेजती है। इस पर साइन करें, साथ में मूल पॉलिसी बॉन्ड, PAN और पहचान पत्र की कॉपी, और कैंसिल चेक के साथ NEFT मैंडेट लगाएँ। सब कुछ मैच्योरिटी से कम से कम एक महीना पहले जमा करें, तो रकम आमतौर पर तय तारीख पर खाते में आ जाती है।
LIC मैच्योरिटी क्लेम प्रक्रिया आसान है, बस समय पर शुरुआत करनी होती है। मैच्योरिटी से लगभग दो महीने पहले LIC एक सूचना पत्र के साथ डिस्चार्ज फॉर्म भेजती है। आप इसे पॉलिसी बॉन्ड, KYC और बैंक विवरण के साथ लौटाते हैं, और मैच्योरिटी रकम आमतौर पर तय तारीख पर आपके खाते में आ जाती है। ज़्यादातर देरी LIC की वजह से नहीं, बल्कि अधूरे कागज़ों की वजह से होती है।
इस गाइड में हर स्टेप, ज़रूरी दस्तावेज़, टैक्स और TDS, बॉन्ड खोने पर क्या करें, और मैच्योरिटी रकम का एक उदाहरण है। हम एक स्वतंत्र वेबसाइट हैं, LIC नहीं। आपके क्लेम पर अंतिम फैसला आपकी सर्विसिंग ब्रांच का होता है।
स्टेप 1: LIC का मैच्योरिटी सूचना पत्र
मैच्योरिटी तारीख से लगभग दो महीने पहले आपकी सर्विसिंग ब्रांच रिकॉर्ड में दर्ज पते पर एक मैच्योरिटी सूचना पत्र भेजती है। इसमें आमतौर पर होता है:
- पॉलिसी नंबर, मैच्योरिटी की तारीख और अनुमानित मैच्योरिटी रकम;
- डिस्चार्ज फॉर्म (आमतौर पर फॉर्म नंबर 3825, यानी डिस्चार्ज रसीद);
- लौटाने वाले दस्तावेज़ों की सूची।
कई पॉलिसीधारकों को SMS या ईमेल भी मिलता है। अगर मैच्योरिटी से एक महीना पहले तक कुछ न आए, तो LIC के आधिकारिक कस्टमर पोर्टल पर पॉलिसी की स्थिति देखें या ब्रांच जाएँ। दस्तावेज़ जुटाने के लिए पत्र का इंतज़ार करने की ज़रूरत नहीं है।
स्टेप 2: डिस्चार्ज फॉर्म भरें
डिस्चार्ज फॉर्म वह रसीद है जिससे आप पुष्टि करते हैं कि आप मैच्योरिटी रकम को पूरे भुगतान के रूप में स्वीकार करते हैं। भरते समय:
- साइन बिल्कुल वैसे ही करें जैसे LIC के रिकॉर्ड में हैं। साइन न मिलना क्वेरी की आम वजह है।
- जहाँ फॉर्म में लिखा हो, वहाँ गवाह के साइन करवाएँ, और ज़रूरत हो तो रेवेन्यू स्टांप लगाएँ।
- साइन पॉलिसीधारक करता है, नॉमिनी नहीं। बच्चे के नाम की पॉलिसी में बालिग होने के बाद बीमित व्यक्ति खुद साइन करता है।
स्टेप 3: NEFT मैंडेट और KYC
LIC मैच्योरिटी का भुगतान सिर्फ बैंक ट्रांसफर (NEFT) से करती है। अगर इस पॉलिसी के लिए बैंक खाता रजिस्टर्ड नहीं है या बदल गया है, तो जमा करें:
- NEFT मैंडेट फॉर्म, और
- एक कैंसिल चेक या बैंक पासबुक का पहला पन्ना, जिस पर आपका नाम, खाता नंबर और IFSC हो।
KYC के लिए PAN और आधार जैसे पहचान व पते के प्रमाण की स्व-प्रमाणित कॉपी दें। PAN ज़रूरी है, क्योंकि अगर भुगतान का कोई हिस्सा टैक्सेबल है तो TDS की दर इसी से तय होती है।
LIC मैच्योरिटी के लिए दस्तावेज़ों की सूची
| दस्तावेज़ | कब चाहिए | ध्यान दें |
|---|---|---|
| डिस्चार्ज फॉर्म (फॉर्म 3825) | हमेशा | निर्देश के अनुसार साइन, गवाह और स्टांप |
| मूल पॉलिसी बॉन्ड | हमेशा | जिन प्लान में मैच्योरिटी के बाद भी कवर चलता है, जैसे न्यू जीवन आनंद 715, उनमें बॉन्ड पर एंडोर्समेंट करके लौटाया जाता है |
| PAN कॉपी (स्व-प्रमाणित) | हमेशा | सही TDS के लिए |
| पहचान और पते का प्रमाण | हमेशा | आधार, पासपोर्ट, वोटर ID या ड्राइविंग लाइसेंस |
| NEFT मैंडेट + कैंसिल चेक | अगर बैंक विवरण रजिस्टर्ड नहीं या बदल गया है | खाते का नाम पॉलिसी से मेल खाना चाहिए |
| उम्र का प्रमाण | अगर पॉलिसी जारी होते समय उम्र ‘एडमिट’ नहीं हुई थी | जन्म प्रमाणपत्र, स्कूल सर्टिफिकेट, पासपोर्ट |
| असाइनमेंट / री-असाइनमेंट के कागज़ | अगर पॉलिसी कभी बैंक आदि को असाइन हुई थी | आपके नाम वापस असाइन होने का प्रमाण |
| इंडेम्निटी बॉन्ड | अगर पॉलिसी बॉन्ड खो गया है | नीचे देखें |
सब कुछ मैच्योरिटी से कम से कम एक महीना पहले जमा करें, ताकि ब्रांच को प्रोसेस करने का समय मिल जाए।
क्या मैच्योरिटी क्लेम ऑनलाइन कर सकते हैं?
LIC अपने कस्टमर पोर्टल पर ऑनलाइन सेवाएँ बढ़ा रही है, और कुछ ब्रांच मैच्योरिटी क्लेम के लिए स्कैन किए दस्तावेज़ भी लेती हैं। ये नियम समय के साथ बदले हैं, इसलिए मौजूदा विकल्प LIC की आधिकारिक वेबसाइट या अपनी ब्रांच से पता करें। मूल बॉन्ड फिर भी ब्रांच भेजना पड़ सकता है। “आपका क्लेम हम कर देंगे” कहने वाले किसी एजेंट या कॉलर को अपना पोर्टल पासवर्ड या OTP कभी न दें।
आमतौर पर कितना समय लगता है
| चरण | आम समय |
|---|---|
| सूचना पत्र भेजा जाता है | मैच्योरिटी से लगभग 2 महीने पहले |
| दस्तावेज़ जमा करें | मैच्योरिटी से कम से कम 1 महीना पहले |
| रकम खाते में | मैच्योरिटी की तारीख पर, अगर कागज़ पूरे हों |
| देर से या अधूरे कागज़ | कागज़ पूरे होने के बाद कुछ दिन से कई हफ्ते |
पॉलिसीधारकों के हितों की सुरक्षा पर IRDAI का 2024 का मास्टर सर्कुलर कहता है कि मैच्योरिटी और सर्वाइवल बेनिफिट तय तारीख पर दिए जाएँ, और बीमा कंपनी की गलती से देरी होने पर ब्याज देना होगा।
उदाहरण: अपनी LIC मैच्योरिटी रकम का अनुमान
प्रिया के पास 20 साल की विद-प्रॉफिट एंडोमेंट पॉलिसी है, जो न्यू एंडोमेंट 714 जैसी है: ₹5 लाख बीमा राशि और ₹25,000 सालाना प्रीमियम। हमने ₹45 प्रति ₹1,000 सालाना बोनस और ₹100 प्रति ₹1,000 फाइनल एडिशनल बोनस मानकर ये आंकड़े LIC मैच्योरिटी कैलकुलेटर में डाले:
| मद | अनुमान |
|---|---|
| बेसिक बीमा राशि | ₹5,00,000 |
| हर साल जुड़ने वाला बोनस | ₹22,500 |
| 20 साल का रिवर्शनरी बोनस | ₹4,50,000 |
| फाइनल एडिशनल बोनस | ₹50,000 |
| अनुमानित मैच्योरिटी रकम | ₹10,00,000 |
| कुल भरा प्रीमियम | ₹5,00,000 |
| रिटर्न (IRR) | लगभग 6.22% सालाना |
LIC हर साल बोनस दर घोषित करती है, इसलिए असली रकम अलग होगी। अपने प्लान की घोषित दरों के साथ बेहतर अनुमान के लिए LIC बोनस कैलकुलेटर इस्तेमाल करें। दो चीज़ें रकम घटा सकती हैं:
- बकाया पॉलिसी लोन। LIC लोन और न चुकाया ब्याज काट लेती है। हमारी LIC पॉलिसी पर लोन गाइड देखें।
- मनी बैक प्लान में पहले मिल चुकी किस्तें अंतिम भुगतान में से घट जाती हैं।
प्रिया का प्रीमियम (₹25,000) बीमा राशि का सिर्फ 5% है, इसलिए ₹10 लाख पूरी तरह टैक्स-फ्री हैं और कोई TDS नहीं कटेगा। अगर पॉलिसी छूट के दायरे में न होती, तो TDS आय वाले हिस्से का 2% होता: 2% × (₹10,00,000 − ₹5,00,000) = ₹10,000।
LIC मैच्योरिटी रकम पर टैक्स
सितंबर 2026 की स्थिति:
- छूट: बोनस सहित मैच्योरिटी रकम आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10(10D) के तहत टैक्स-फ्री है, अगर किसी भी साल का प्रीमियम बीमा राशि के 10% से ज़्यादा न रहा हो (1 अप्रैल 2012 से जारी पॉलिसी) या 20% से ज़्यादा न रहा हो (1 अप्रैल 2003 से 31 मार्च 2012 के बीच जारी पॉलिसी)। कुछ विशेष विकलांगता या बीमारी वाले लोगों की पॉलिसी पर 15% की सीमा है।
- ₹5 लाख प्रीमियम सीमा: 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद जारी नॉन-ULIP पॉलिसियों में, अगर ऐसी सभी पॉलिसियों का कुल सालाना प्रीमियम ₹5 लाख से ज़्यादा है, तो छूट नहीं मिलती। तब आय वाला हिस्सा (भुगतान में से प्रीमियम घटाकर) टैक्सेबल होता है। डेथ क्लेम पर छूट बनी रहती है।
- TDS: छूट न होने पर LIC आय वाले हिस्से पर 2% TDS काटती है (1 अक्टूबर 2024 से 5% से घटाकर), अगर साल में यह ₹1 लाख से ज़्यादा हो। PAN न होने पर दर काफी ज़्यादा है।
- नया आयकर कानून: 1 अप्रैल 2026 से आयकर अधिनियम, 2025 ने 1961 के कानून की जगह ली है। ऊपर के नियम जारी हैं, पर धाराओं के नंबर बदल गए: 10(10D) की छूट अब धारा 11 के साथ अनुसूची II में है, और पुरानी धारा 194DA वाला TDS अब धारा 393(1) के तहत आता है। ज़्यादातर फॉर्म और लेख अभी भी पुराने नाम इस्तेमाल करते हैं।
टैक्स नियम बदलते रहते हैं, इसलिए रिटर्न भरने से पहले अपने मामले की पुष्टि टैक्स सलाहकार से करें।
पॉलिसी बॉन्ड खो जाए तो क्या करें?
घबराएँ नहीं, पैसा आपका ही है। जैसे ही पता चले कि बॉन्ड नहीं मिल रहा, अपनी सर्विसिंग ब्रांच को लिखित में बताएँ। आम तौर पर ये स्टेप होते हैं:
- डुप्लीकेट पॉलिसी के लिए, या मूल बॉन्ड के बिना क्लेम निपटाने के लिए लिखित अनुरोध।
- आपके राज्य में लागू मूल्य के स्टांप पेपर पर इंडेम्निटी बॉन्ड।
- बड़ी रकम में, गुमशुदगी की सूचना देता अखबार का विज्ञापन।
- डुप्लीकेट बॉन्ड जारी हो तो उसकी छोटी-सी फीस।
इसमें कई हफ्ते लग सकते हैं, इसलिए मैच्योरिटी से काफी पहले शुरू करें।
मैच्योरिटी रकम लेने के विकल्प
पूरी रकम एक साथ लेना हमेशा ज़रूरी नहीं:
- एकमुश्त: डिफ़ॉल्ट विकल्प। पूरी रकम मैच्योरिटी की तारीख पर मिलती है।
- सेटलमेंट ऑप्शन: 2014 के बाद आए कई प्लान में मैच्योरिटी रकम 5, 10 या 15 साल तक सालाना, छमाही, तिमाही या मासिक किस्तों में ली जा सकती है। यह आमतौर पर मैच्योरिटी से पहले चुनना होता है, और किस्त की न्यूनतम सीमा होती है।
- पेंशन या एन्युटी प्लान: वेस्टिंग पर रकम का एक हिस्सा प्लान के अनुसार एन्युटी खरीदने में जाता है।
आपके प्लान में ये विकल्प हैं या नहीं, यह पॉलिसी दस्तावेज़ में या ब्रांच से पता करें।
देरी की आम वजहें
- डिस्चार्ज फॉर्म या मूल बॉन्ड देर से जमा करना।
- नाम, साइन या बैंक विवरण का LIC रिकॉर्ड से मेल न खाना।
- NEFT मैंडेट न होना, या रजिस्टर्ड बैंक खाता बंद हो जाना।
- PAN जमा न करना या लिंक न होना।
- बैंक या किसी लेंडर को किया गया असाइनमेंट क्लियर न होना।
- पॉलिसी जारी होते समय उम्र एडमिट न होना और उम्र का प्रमाण न देना।
- बकाया लोन या न भरे प्रीमियम, जिन्हें पहले एडजस्ट करना पड़ता है।
मुख्य बातें
- मैच्योरिटी से लगभग दो महीने पहले LIC का सूचना पत्र आता है। दस्तावेज़ जुटाने के लिए उसका इंतज़ार न करें।
- डिस्चार्ज फॉर्म, मूल बॉन्ड, PAN, पहचान पत्र और NEFT विवरण कम से कम एक महीना पहले जमा करें।
- पूरे और सही कागज़ हों, तो भुगतान आमतौर पर मैच्योरिटी की तारीख पर होता है।
- ज़्यादातर मैच्योरिटी रकम टैक्स-फ्री होती है, पर 10% प्रीमियम नियम और नई पॉलिसियों पर ₹5 लाख की सीमा ज़रूर जाँचें।
- बॉन्ड खो गया हो तो इंडेम्निटी की प्रक्रिया जल्दी शुरू करें।
- अपनी रकम का अनुमान LIC मैच्योरिटी कैलकुलेटर से लगाएँ और रिटर्न की तुलना LIC रिटर्न कैलकुलेटर से करें।
ये कैलकुलेटर आज़माएँ
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
LIC मैच्योरिटी का सूचना पत्र कब भेजती है?
आमतौर पर मैच्योरिटी तारीख से लगभग दो महीने पहले, रिकॉर्ड में दर्ज पते पर डाक से, और अक्सर SMS या ईमेल से भी। अगर मैच्योरिटी से एक महीना पहले तक कुछ न आए, तो अपनी सर्विसिंग ब्रांच से संपर्क करें या LIC कस्टमर पोर्टल पर पॉलिसी की स्थिति देखें।
LIC मैच्योरिटी के लिए कौन-से दस्तावेज़ चाहिए?
साइन किया हुआ डिस्चार्ज फॉर्म, मूल पॉलिसी बॉन्ड, स्व-प्रमाणित PAN कॉपी, आधार जैसा पहचान और पते का प्रमाण, और कैंसिल चेक या पासबुक कॉपी के साथ NEFT मैंडेट फॉर्म। अगर उम्र 'एडमिट' नहीं हुई थी तो उम्र का प्रमाण, और असाइनमेंट हुआ हो तो उसके कागज़ भी लग सकते हैं।
LIC मैच्योरिटी का पैसा कितने दिन में आता है?
अगर पूरे दस्तावेज़ तय तारीख से पहले ब्रांच पहुँच जाएँ, तो LIC आमतौर पर मैच्योरिटी की तारीख पर ही भुगतान कर देती है। देर से या गड़बड़ी वाले कागज़ होने पर कुछ हफ्ते और लग सकते हैं। IRDAI के नियमों के अनुसार मैच्योरिटी का भुगतान तय तारीख पर होना चाहिए।
क्या LIC मैच्योरिटी रकम पर टैक्स लगता है?
आमतौर पर नहीं, अगर किसी भी साल का प्रीमियम बीमा राशि के 10% से ज़्यादा न रहा हो (अप्रैल 2003 से मार्च 2012 के बीच जारी पॉलिसी के लिए 20%)। 1 अप्रैल 2023 या उसके बाद जारी नॉन-ULIP पॉलिसियों में अगर कुल सालाना प्रीमियम ₹5 लाख से ज़्यादा है, तो छूट नहीं मिलती।
LIC मैच्योरिटी पर कितना TDS काटती है?
अगर मैच्योरिटी रकम टैक्स-फ्री नहीं है, तो LIC आय वाले हिस्से पर, यानी भुगतान में से भरे गए प्रीमियम घटाकर बची रकम पर, 2% TDS काटती है, बशर्ते साल में रकम ₹1 लाख से ज़्यादा हो। 1 अक्टूबर 2024 से यह दर 5% से घटकर 2% हुई। PAN न देने पर दर काफी ज़्यादा होती है।
मैच्योरिटी से पहले LIC पॉलिसी बॉन्ड खो जाए तो क्या करें?
अपनी सर्विसिंग ब्रांच को लिखित में बताएँ। डुप्लीकेट पॉलिसी जारी करने या क्लेम निपटाने से पहले LIC आमतौर पर स्टांप पेपर पर इंडेम्निटी बॉन्ड, और बड़ी रकम में अखबार में गुमशुदगी का विज्ञापन मांगती है। इसमें कई हफ्ते लग सकते हैं, इसलिए जल्दी शुरू करें।
क्या LIC मैच्योरिटी रकम किस्तों में ले सकते हैं?
कई नए LIC प्लान में सेटलमेंट ऑप्शन होता है, जिसमें मैच्योरिटी रकम एकमुश्त की जगह 5, 10 या 15 साल तक सालाना, छमाही, तिमाही या मासिक किस्तों में मिलती है। यह विकल्प मैच्योरिटी से पहले चुनना होता है। अपने प्लान की शर्तें देखें या ब्रांच से पूछें।
अस्वीकरण: LIC प्रीमियम कैलकुलेटर एक स्वतंत्र वेबसाइट है। हमारा भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) से कोई संबंध या समर्थन नहीं है। सभी आंकड़े केवल अनुमान हैं; पॉलिसी लेने से पहले सही प्रीमियम और लाभ LIC या लाइसेंस प्राप्त एजेंट से ज़रूर पुष्टि करें।